जीवन में उतार चढाव का Sanjay Dutt से अच्छा कोई सही उदाहरण नहीं मिल सकता , शायद वो खुद नहीं बता सकते की जीवन में कितनी बार वे नीचे गए और फिर संघर्ष कर के मुकाम हासिल किया , उनकी  जन्म दिनांक है 29 july 1959 , जन्मांक (Psychic No ) हुआ 2 , ये है चन्द्रमा का अंक जो नित्य अपनी कला बदलता है और कभी प्रकाश बिखेरता तो कभी पूरी तरह अँधेरे के आगोश में रहता है , वैसे ही कुछ जीवन होता है चन्द्रमा के अंक 2 से जुड़े लोगो का, हलाकि ये परिस्थिति सबके साथ नहीं होती परन्तु फिर भी उतार चढाव से गम्भीर रिश्ता रहता है।

Sanjay Dutt का नामांक है 3 , जो की गुरु  का अंक है इसीलिए  गुरु का आशीर्वाद हर बड़ी परेशानी के बाद उन्हें वापस से पैर ज़माने में मदद करता रहा है, वैसे कुंडली में बारहवे स्थान (12th house ) में स्थित गुरु ही sanjay dutt के उतार चढ़ाव भरे जीवन का बड़ा कारण  है , वृश्चिक लग्न की उनकी कुंडली में गुरु पंचम भाव (5th House) का स्वामी है , जो की पद और प्रतिष्ठा का भाव है , गुरु का बारहवे भाव में होना राज भंग योग का निर्माण कर रहा है, दशम भाव (10th House) के स्वामी ग्रह सूर्य (sun) का नवमांश में नीच का होना भी इस योग का निर्माण कर रहा है जो गम्भीर क़ानूनी संघर्ष का इशारा कर रहा है, इसके अलावा लग्नेश मंगल भी नवमांश में नीच का है , इस तरह से कुंडली में चार  बार बने राज भंग योग ने अपना प्रभाव पूरी तरह दिखाया और इन्हें गम्भीर आरोपों के तहत जेल में लंबी सजा तक  कटवाई और जीवन के कई वर्ष गंभीर मानसिक प्रताड़ना के दौर से गुजरना पड़े , Sanjay Dutt की कुंडली में तीसरी बार राजभंग योग बना बारहवे भाव के स्वामी शुक्र (venus) के दशम भाव (10th House ) में स्थित होने से।

 

10th House में स्थित शुक्र -मंगल के योग ने जिसमे से शुक्र 7th House का भी lord भी है इनके वैवाहिक जीवन में भी बड़ा अशांत बनाया , दशम भाव इनकी कुंडली का उप पद लग्न भी है किसका स्वामी ग्रह सूर्य नवमांश में नीच का है।  दशम में स्थित लग्न के स्वामी मंगल ने जो की सिंहासन योग निर्मित कर रहा है हर बड़ी परेशानी के बाद नयी ऊंचाइया दी, मार्च 2013 में गुरु की महादशा और राहु की अन्तर्दशा में उन्हें 5 वर्ष की सजा सुनाई गयी जिसमे से 18 माह वे पहले ही जेल में गुजार चुके थे , गुरु बारहवे भाव में और राहु उससे बारहवे अर्थात ग्यारहवे भाव में स्थित है , April -1993  में भी sanjay dutt लम्बे समय तक जेल में रहे तब राहु में शुक्र की दशा चल रही थी , शुक्र बारहवे भाव का स्वामी हो कर दशम भाव में है और राजभंग योग निर्मित कर रहा है।

मुम्बई में हुए (1993 ) बम कांड में sanjay dutt अपना  नाम आने के पहले तक ,1981 से शुरू किये अपने फ़िल्मी सफर में वे एक स्थापित और सफल सितारा बन चुके थे और कई सफल और multi starer फिल्मे दे कर अपनी अभिनय क्षमता सिद्ध कर चुके थे , ये समय था राहु की दशा का जो 11th House में स्थित है , 10th House में स्थित शुक्र ने परेशानियों के साथ साथ इन्हें सितारा बनने में भी सहयोग दिया।

शनि चतुर्थ भाव का स्वामी है और दूसरे भाव में स्थित हो अपनी तीसरी दृष्टि से चतुर्थ भाव को मजबूत बना रहा है , माँ के इस भाव पर गुरु, शुक्र और मंगल की भी दृष्टि है , उन का लगाव अपनी माँ नरगिस दत्त से बहुत रहा जो की एक सफल और प्रसिद्ध अभिनेत्री थी।  चतुर्थ भाव (4th House) कुंडली में आरूढ लग्न के साथ साथ लोकप्रियता का भी भाव है जिसने समय समय पर   इन्हे महत्वपूर्ण  अवार्ड्स दिलवाये और  जबरदस्त लोकप्रियता दिलवाई।  चन्द्रमा का आरूढ लग्न से चतुर्थ में होना और AL पर गुरु की दृष्टि होना भी सफल व्यवसायिक जीवन के लिए राजयोग का निर्माण करता है , इस योग ने भी अपना काम किया और सफल बॉलीवुड सितारा बनाया , 9th House में बन रहे मजबूत सूर्य-बुध के बुधादित्य योग ने बड़े उतार चढाव के बाद भी भाग्य का सहयोग और सफल एवं प्रसिद्ध पिता की संतान होने का गौरव दिलाया।

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पंकज उपाध्याय

इंदौर

www.pankajupadhyay.com

 

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