महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) का जन्म सूर्य के नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी में हुआ है ,सूर्य कुंडली के दशम भाव (10th House) में  स्थित है जो की profession का भाव  है , लग्न का नक्षत्र भी चन्द्र का है चन्द्रमा लग्न में ही स्थित है , ये दोनों ही ग्रह योग जीवन में ऊंचाई हासिल करने के लिए परिस्थिति निर्मित करते  है।  लग्न का lord बुध   दशम भाव (10th House) अर्थात कर्म क्षेत्र का भी lord भी है और 10th house में स्थित हो कर लग्न और दशम भाव के बीच मजबूत सम्बन्ध बना रहा है, ये सम्बन्ध सिंहासन योग निर्मित करता है और अपने कर्म क्षेत्र में उच्चतम की सफलता सुनिश्चित करता है, हलाकि दशम में स्थित सूर्य बारहवे भाव का स्वामी है और राजभंग योग निर्मित करता है परंतु लग्नेश (1st House Lord) और दशमेश (10th house lord ) के बहुत मजबूत होने से ये निष्प्रभावी सा है, 1st House lord के कमजोर होने के परिस्थिति में अवश्य यह योग प्रभावशील हो कर व्यावसायिक जीवन में उतार चढाव देता।

लग्न (1st House ) में मजबूत गजकेसरी योग बना है और साथ में पंचम भाव (छठे भाव का स्वामी भी) का स्वामी शनि है , लग्न में बने इस गजकेसरी योग ने जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई, गुरु (jupiter) के साथ और मित्र बुध (mercury) की राशि में होने की वजह से शनि का नवमांश में नीच और छठे भाव के स्वामी होने दुष्प्रभाव निष्क्रिय है  , परंतु लग्न में बन रहे इस ग्रह योग ने उन्हें गंभीर और गहरी सोच वाला बनाया।

मंगल की नवम (9th सेhouse) से तृतीय भाव (rd House) पर दृष्टि ने उन्हें चपल और सफल खिलाडी होने के लिए आवश्यक शारीरिक बल प्रदान किया।  लाभ भाव (11th House) में शुक्र -राहु की युति को बड़ा धन योग बताया गया है , यंहा शुक्र दूसरे और नवम (भाग्य) भाव का स्वामी है, जिसने अकूत धन सम्पदा के लिए भाग्य का सहयोग दिलाया, दूसरे स्थान और  ग्यारहवे स्थान का आपस में सम्बन्ध भी बड़ा धन योग होता है।  शुक्र वैसे भी मीडिया और लोकप्रियता का ग्रह है अतः उसने विज्ञापन जगत में पैर ज़माने में मदद की और कमाई में फायदा दिलाया।

 वे 1995 से मंगल की दशा के प्रभाव में थे जो  की भाग्य स्थान में है , भाग्य स्थान से जुड़ा ग्रह भाग्य में बड़ा बदलाव लाता है और ऐसा ही इनके साथ हुआ , इसी दशा में उन्हें क्रिकेट जीवन में स्थापित होने और बड़ा नाम बनने के लिए बड़ी सफलता मिलना शुरू हो गयी , इसी दशा के दौरान 99 -2000 में वे रणजी ट्रॉफी के लिए चुने गए।  इसके बाद 2003-2004 में राहु की दशा की शुरुआत में ही उन्हें बड़ी  सफलता मिली जो की भाग्य स्थान के स्वामी शुक्र के साथ महत्वपूर्ण 11th House में है और वे India A Team में चुने गए ।

Dec 2005 में राहु-गुरु के दशा काल में धोनी ने अपने test cricket की शुरुआत की , वैसे उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि थी देश को विश्व कप ला कर देना , ये समय था राहु -बुध-केतु  का, बुध जो की सिंहासन योग निर्मित कर रहा है और राहु का मित्र है , साथ ही केतु पांचवे भाव में है।  बुध कुंडली में जितनी अच्छी स्थिति में होगा उतना ही अच्छा फल राहु की दशा में प्राप्त होता  है।  इस बड़ी उपलब्धि के समय गुरु (jupiter) का गोचर भी उनकी राशि एवं लग्न से सप्तम तथा शनि (saturn) का शनि ऊपर से हो रहा था , इस गुरु की दृष्टि राहु पर थी जिसकी दशा चल रही थी।

2015 के विश्व कप में ग्रहो का वो सहयोग नहीं मिला क्योंकि उस समय राहु में शुक्र (venus) के अंतर का था और दोनों में से किसी भी ग्रह का सीधा सम्बन्ध लग्न , दशम या पंचम भाव से नहीं था क्योंकि उच्चतम सफलता के लिए देखा गया ही की जिन ग्रहो की दशा चल रही हो वो इन भावो से जुड़े हो।  आने वाले लंबे समय तक किसी न किसी तरह से उन्हें भाग्य का सहयोग मिलता रहेगा क्योंकि राहु (rahu) की दशा बाकि है और गुरु भी मजबूत स्थिति में है।

Click to read ..some important combinations for higher level of success

पंकज उपाध्याय

इंदौर

www.pankajupadhyay.com

FacebookTwitterGoogle+Blogger PostShare

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


*

Comments


    No Comments Found

Subscribe to our newsletter